वक्तः शाम के 6 बजे
डेटः 18 दिसंबर
जगहः बुद्व चौक, वसुंधरा चौक, एलीवेटेड रोड एंट्री

डिजायर और ऑटो की आमने-सामने की टक्कर हुई। दोनो ही गाड़ियां बुरी तरह से क्षतिग्रस्त। आमने-सामने की टक्कर एक ऐसी सड़क पर जहां सिर्फ वन वे है और साफ-साफ दिख रहा है लेकिन किसी बढ़िया युनिवर्सिटी से ड्राइविंग की योग्यता लेकर आए डिजायर गाड़ी के ड्राइवर साहब अपनी गलती मानने के बजाए ऑटो वाले को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में किए हुए थे। शायद भाई साहब के पास बंदूक नहीं थी नहीं तो ऑटो वाले को दाग देते और अपनी बेगुनाही का सुबूत देते हुए पुलिस वालों की नजरों से हमेशा के लिए गायब हो जाते। मैं जितना देख सकता था बस इतना ही था कि लड़ाई पूरे चरम पर थी, लेकिन मैं अपनी साइकल से आगे बढ़ गया और आगे बढ़ते ही सामने से एक और गलत दिशा से आती कार नजर आई मैंने उसका वीडियो बना लिया। रांग साइड ड्राइविंग के वजह से न जाने कितने लोग अपनी जान गंवाते हैं। मैं इस देश का कानून नहीं हूं लेकिन अगर सच में मुझे कुछ बदलाव करने को मिले तो रांग साइड वालों को बिना सुनवाई फांसी की सजा दिलवाने से परहेज नहीं करूंगा। रांग साइड ड्राइविंग के वजह से उन न जाने कितने मासूमों ने अपनी जानें गंवाई हैं जो कानून का पालन करते हुए सही दिशा से ड्राइविंग कर रहे थे।

एक बात समझ नहीं आती कि आखिर यातायात पुलिस किसी भी शहर की ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने से क्यूं बचती है? इसका जवाब जानने के लिए एकदिन मैंने बहुत ही दिलेरी दिखाते हुए उस समय पुलिस को उनका काम समझाने की कोशिश कि जब ऐलीवेटेड रोड पर बैठे एक पुलिस वाले को मैंने कहा कि भाई साहब आपके सामने से ये गलत दिशा से ड्राइविंग करते हुए जा रहे हैं और आप चुप बैठे हैं। इस पर पुलिस वाले भाई साहब का कहना था कि अरे भैया आप अपनी राह देखो न, ये लोग यहां के पहुंचे हुए लोग हैं हमारी नौकरी खा जाएंगे। और ये बात काफी हद तक सच है कि देश के कई शहरों में इस तरह की चीजों को पुलिस वाले रोकने के बजाय अपनी मूक सहमति दे देते हैं।

हद तो तब हो जाती है अपने इस शहर में-मैं गाजियाबाद की बात कर रहा हूं-जब रांग साइड से ड्राइव करके आ रहा बंदा मां-बहन की गाली कुत्तों की तरह देते हुए सही दिशा से आ रहे लोगों को उनके सही होने पर शर्मिंदा कर देता है। रांग राइड एक मानसिक बीमारी है जिसमें लोग बचा लेते हैं 100 मीटर, 200 मीटर या फिर 1 किलोमीटर। रांग साइड बोले तो दादागिरी, कानून तोड़ना बोले तो बादशाहियत, पुलिस वाले को गाली देने का मतलब दबंग। मैं न तो पुलिस हूं न कानून, मैं आम जनता हूं और वो वाली जनता हूं जो साइकल चलाते हुए रांग साइड चलने के बजाए 1 किलोमीटर दूर जाकर यू टर्न लेने में विलीव करता है। जब भी मैं रांग साइड से किसी को आते हुए देखता हूं मेरा खून खौल जाता है।

आपको एक बड़ी बताता चलूं जानकर आप दंग रह जाएंगे। शहरों में होने वाले 45 फीसदी जाम की वजह बनती है ये रांग साइड ड्राइविंग या राइडिंग। अगर सरकार कुछ दिनों के लिए सिर्फ इस पर कड़ा एक्‍शन ले ले तो सरकारी खजाना भी अच्छे से भर जाएगा और लोग सही दिशा पा जाएंगे। लेकिन फिर सवाल उठता है कि ऐसा करके सरकार को क्या मिलेगा? जवाब है कुछ नहीं मिलेगा। लोग सुधर जाएंगे तो पार्टियों के लिए गुंडे कहां से आएंगे, लोग सुधर जाएंगे तो वोट के समय लोगों को धमकाने का काम कौन करेगा। अगर लोग सुधर जाएंगे तो सड़क दुर्घटना में मरने वाले लोगों की संख्या में गिरावट आ जाएगी।

मैंने दिल्ली पुलिस को एकदिन अक्षर धाम फ्लाईओवर पर 60 की स्पीड में गलत दिशा से आ रही गाड़ी का वीडियो भेजा। जवाब आया महोदय गाड़ी का नंबर स्पष्ट नहीं है। मैंने वीडियो को ध्यान से देखा एक स्क्रीनशॉट निकाला और दोबारा दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को ट्वीट किया। उसके बाद आज तक कोई जवाब नहीं आया। अरे भैया हमने आपका काम कर दिया कम से कम ड्राइवर महोदय को कॉल करके ये तो बता देते उन्होंने कितना बड़ा गुनाह किया है। मरना तो सबको एकदिन है लेकिन हम उस व्यक्ति की वजह से क्यूं मरें जो कानून का पालन नहीं करता और गलत दिशा से ड्राइव करने में अपनी बहादुरी समझता है।

मुझे पता है कि सरकार के पास और भी मुद्दे हैं और पुलिस के पास और इसके अलावा ढेर सारा काम। तो ऐसे में हम क्यूं न उन लोगों को एक्सपोज करें जो ये रांग साइड वाला गुनाह करते हैं। मैं बना रहा हूं रांग साइड वालों का वीडियो आप भी ऐसे लोगों का वीडियो बनाएं और संबंधित विभाग के साथ मुझे भी टैग करें। मेरा‌ ट्विटर हैंडल है /adwivedi09 और हैशटैग में लिखें #NoWrongSideDrive । अगर अभी नहीं जागोगे तो वो आपको मार देंगे जिन्हें गलत दिशा वाली ड्राइविंग में अपनी मर्दानगी दिखती है। ऐसे लोगों को आओ मिलकर आइना दिखाएं, प्रशासन मदद करे तो ठीक नहीं तो हम खुद उनका डेटा बनाएं।

दूसरे की गलती से मौत को गले लगाने से अच्छा है, उन्हें सही दिशा का ज्ञान कराएं। आओ मिलकर सबको ड्राइविंग सिखाएं।