हेडलैंप जैसा की नाम से ही स्पष्ट है एक ऐसी वस्तु जो मागदर्शन काम काम करती है रात के अंधेर में, ठीक वैसे ही जैसे टॉर्च या फिर लॉलटेन का प्रयोग होता है। लेकिन हेडलैंप गाड़ियों में लगाए जाते हैं। इतिहास के झरोखों में देखेंगे तो आपको एक तस्वीर नजर आएगी लकड़ी के पहियों पर दौड़ने वाली बिना घोड़े वाली गाड़ी (horseless carriages) जिसमें रात होते ही इसके सामने दो कैंडल लैंप लटकाए जाते थे जिससे रास्ता दिखता रहे। उस गति के हिसाब से ये लैंप अपना काम बखूबी कर रहे थे। लेकिन जैसे ही रफ्तार बढ़ी और तकनीकि नए प्रयोगों के कसौटी पर खरा उतरते हुए निखरने लगी ये कैंडल लैंप हेडलैंप बन गए। इस आलेख में हम बात कर रहे हैं हेडलैंप(Headlamp) के प्रकार की।

Halogen headlights
हैलोजन बल्ब ठीक उसी प्रकार के इलेक्ट्रिक बल्ब होते हैं जिन्हें आमतौर पर घरों में प्रयोग में लिया जाता है। लेकिन घरों में लगे बल्ब का तंतु या यूं कहें फिलामेंट छोटा होता है और इसमें गर्मी के जरिए रोशनी बिखरने लगती है, जबकि हैलोजन लैंप हैलोजन गैस के प्रयोग से रोशनी देता है जिसमें काफी ब्राइटनेस होती है। लेकिन आपको बता दें कि ये बल्ब बहुत Efficient नहीं होते और इनसे गर्मी ज्‍यादा होती है रोशनी कम। हैलोजन बल्ब का प्रयोग Automobile में येलोइश प्रकाश के लिए किया जाता है और ये तकनीकि 60 साल से भी ज्यादा पुरानी है। अगर बात ब्राइटनेस की करें तो ये 100 मीटर तक रोशनी आगे फेंक सकते हैं।

Xenon Headlight
इसे एचआईडी यानी कि हाई इंटेनसिटी डिस्चार्ज भी कहा जाता है। जेनन लैंप ट्यूबलाइट जैसा होता है। इसमें किसी फिलामेंट का प्रयोग नहीं किया जाता जो कि गर्म होकर अपना उद्देश्य पूरा करता है बल्कि जेनन गैस बिजली से चार्ज होकर अपना काम करती है। ये ब्लूइश-व्हाइट लाइट पैदा करता है जो कि प्राकृतिक लाइट जैसा होता है। वैसे तो हैलोजन की तुलना में जेनन लैंप ज्यादा महंगे पड़ते हैं पर ये बहुत लंबे समय तक चलते हैं व ज्यादा एफीसिएंट होते हैं। ट्यूबलाइट की ही तरह पूरी तरह से प्रकाशित होने में जेनन भी थोड़ा सा ज्‍यादा वक्त लेते हैं, इसी वजह से आमतौर पर इनके साथ हाई व पासिंग बीम के लिए कंपनिया हैलोजन बल्ब का प्रावधान भी इनके साथ करके रखती हैं। तो आप यूं समझ सकते हैं कि जेनन हेडलाइट वाली कार के दोनों यूनिट में दो-दो बल्ब लगाए जाते हैं।

Bi-Xenon Headlight
बाई-जेनन हेडलाइट थोड़ा कंफ्यूजिंग लगता है क्यूंकि नाम सुनने से ऐसा लगता है कि बाई यानी कि दो। लेकिन बाइ जेनन सिर्फ एक जेनन लैंप का प्रयोग करता है हाई बीम के लिए जो कि लो बीम के वक्त या तो मूव हो जाता है या फिर ढक जाता है। लैंप यूनिट में ये कम जगह लगता है और ये थोड़ा सस्ता भी रहता है।

Projector Lens
ये सुनने में काफी अलग व थोड़ा प्रीमियम लगता है लेकिन आपको बता दें इसका काम उत्सर्जित हो रहे प्रकाश को सड़क पर फोकस करना होता है। इसकी तुलना आप मूवी प्रोजक्टर से कर सकते है जो कि बहुत से लोग अपने घरों में लगाते हैं या फिर आफिस में प्रयोग किए जाते हैं। आपको ये भी बात पता होना चाहिए कि प्रोजक्टर इस्तेमाल किसी भी प्रकाश के स्रोत हैलोजन, जेनन या फिर एलईडी लैंप के साथ किया जा सकता है।

LED Headlight
ये सबसे कम ऊर्जा खपत करने वाला प्रकाश का माध्‍यम है। सरल भाषा में कहें तो, एक एलईडी या प्रकाश उत्सर्जक डायोड इलेक्ट्रॉनों की गति से प्रकाश का निर्वहन करता है और इस तरह, एक सरल और अत्यधिक कुशल प्रणाली है। एलईडी तुरंत जल उठती है और ये इसका सबसे बड़ा एडवांटेज है, किसी भी अन्य लाइट की तुलना में ये ज्यादा चलता है व किफायती रहता है। इनका इस्तेमाल गाड़ियों में टेललाइट व एलईडी डेटाइम रनिंग लाइटों में किया जाता है। हालांकि टेक्नोलॉजी निरंतर प्रगति पथ पर है और अब लोवर लाइट इंटेनसिटी को देखते हुए अब ये हेडलाइट में भी अपनी जगह बनाने लगी हैं। इसका फायदा ये होता है कि ये दूर तक रोशनी देती है। कुछ कार निर्माता अपने प्रोडक्ट में अब एलईडी को लो बीम के लिए प्रयोग करते हैं जबकि कुछ ऐसे भी हैं जो लो व हाई दोनों में एलईडी को जगह दे रहे हैं।

Daytime Running Light
इसका मतलब साधारण तौर पर कुछ यूं समझें जैसे आपकी गाड़ी ऑन होगी ये जलना शुरू हो जाती है। ये बहुत ही कम ऊर्जा का खपत करती हैं, बहुत से लोग इसे गाड़ी के डिजाइन व स्टाइल के उद्देश्य के तौर पर देखते हैं लेकिन ये गाड़ी की विजिविलिटी के लिए लगाए जाते हैं। इसमें बहुत ज्यादा कॉस्ट नहीं आती यही वजह है कि ज्यादातर मैन्यूफैक्चरर इसे स्टैंडर्ड फीचर के रूप में अपनी गाड़ी में देते हैं।

Laser Headlight
ये लाइटें लेजर बीम के जरिए गैस से प्रकाशित होती हैं, इनका ग्लो काफी ब्राइट व शक्तिशाली होता है। लेजर लाइटों का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि ये बहुत छोटी होती हैं लेकिन बहुत ज्यादा दूर तक सड़क को रोशन कर देती हैं। ये टेक्नोलॉजी अब तेजी से चलन में आ रही है, लेकिन ‌फिलहाल ये लग्जरी कारों में ही अपनी जगह बना पाई हैं वजह है इनका बहुत ज्यादा महंगा होना।

Cornering Light
जब आप स्टीयरिंग व्हील को घुमाते हैं ये लाइटें अपना काम करना शुरू कर देती हैं। इसका मतलब साफ है कि उस मोड़ को ये प्रकाशित कर देती हैं जहां से ड्राइवर मुड़ रहा होता है। जैसे ही ड्राइवर टर्न पूरा करता है ये अपने आप बंद हो जाती हैं। ये लाइट या तो मेन यूनिट में होती है या फिर अलग लैंप के जरिए जरूरत के हिसाब से लगाई जाती हैं।

Digital LED Headlights
इस सिस्टम के तहत आप अपनी गाड़ी के हेडलाइट को हाई बीम पर चला सकते हैं। ये लाइट अपने हिसाब से सामने से आती गाड़ी को देखकर अनुकूल माहौल में ढल जाती है। इससे सामने से आ रही गाड़ी के चालक को कोई दिक्कत नहीं होती है। ये एक महंगी तकनीकि है जिसका प्रयोग दुनिया की लग्जरी कारों में किया जाता है।