2018 Africa Twin

रजत राणा

सुपर बाइक यह शब्द आपको रफ़्तार तथा रोमांच की उस दुनिया की स्मृति करता है जहाँ विश्व की उच्च तकनीक और सर्वोत्तम डिजाइन का मेल होता है। हमारे देश भारत में भी युवाओ में इसके प्रति रुझान बढ़ता जा रहा है लेकिन अभी भारतीय बाजार में इनकी उपलब्धता बहुत ही सीमित है, पर आने वाले कुछ सालों में और कुछ और बड़ी बाइक कंपनियों के नाम यहाँ देख पाएंगे। हाल ही में एक सर्वे के मुताबिक 2025 तक बड़ी मोटरसाइकिलों का बाजार भारत में 18 फीसद वार्षिक दर से बढ़ेगा।
ग्लोबलाइजेशन और आर्थिक क्षेत्रों में गत दो दशकों में हुए बदलाव ने भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार को हर क्षेत्र में एक नया वर्ग उपलब्ध कराया है तथा इस नए वर्ग की आर्थिक क्षमता विदेशी ब्रांड्स को भी भारत में आने के लिए सोचने पर मजबूर कर रही हैं। भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र भी इस बदलाव से अछूता नहीं है, किसी समय में BMW, Harley Davidson, Triump, Ducati, Honda तथा Yamha जैसे ब्रांड्स की बाइक्स सड़को पर सिर्फ मेट्रो शहरों में ही दिखती थी लेकिन अब इनकी पहुंच अन्य बड़े शहरों तक भी हो गयी है। नयी पीढ़ी में इनके प्रति आकर्षण साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है परिणामस्वरूप हर साल भारतीय बाजार में इनका वर्चस्व बढ़ता ही जा रहा है। भारतीय ग्राहकों की बढ़ती हुई क्रय क्षमता भी इनके विस्तार में सहायक है वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट के अनुसार हाई नेटवर्थ इंडिवीडुअल्स(HNI) के हिसाब से भारत विश्व में 12वें स्थान पर है जो की विदेशी निर्माताओं को यहाँ के बाजार में खींचने के लिए संतोषजनक है।

0 से 100 किमीप्रघं महज 4 सेकंड में यह सुनने में ही अचंभित और रोमांचित करता है और इन बाइक्स का निर्माण इसी रोमांच को जीवित रखने के लिए किया गया है सुपर बाइक्स को इंजन कैपेसिटी के हिसाब से तीन भागों में तथा इनके डिज़ाइन और उपयोगिता के हिसाब से दो भागो में बांटा जा सकता है। डिज़ाइन और उपयोगिता के हिसाब से क्रूजर बाइक्स तथा स्पोर्ट्स बाइक, और इंजन क्षमता के हिसाब से 400 से 600 सीसी की क्षमता वाली बाइक्स जिन्हे आप एंट्री लेवल सेगमेंट भी कह सकते है भारतीय तथा विदेशी दोनों ही ब्रांड्स मौजूद है बजाज डोमिनॉर और केटीएम आरसी 390 जो की स्पोर्ट्स बाइक है वही रॉयल एनफील्ड एकमात्र भारतीय क्रूजर बाइक निर्माता है।

दूसरे सेगमेंट में से 850 सीसी तक की बाइक्स है इस सेगमेंट और इस से ऊपर कोई भी भारतीय स्पोर्ट्स बाइक निर्माता नहीं है वही क्रूजर बाइक में रॉयल एनफील्ड एकमात्र निर्माता है। इस सेगमेंट में सभी बड़े ब्रांड्स की बाइक्स मौजूद है तथा भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाला एकमात्र बाजार भी यही है। तीसरा सेगमेंट सही मायनो में सुपर बाइक कहलाती है ये मशीन डिज़ाइन तकनीक, रफ़्तार और रोमांच का अनूठा संगम है। भारत में इनके बढ़ते हुए वर्चस्व के बावजूद कुछ कमियां है जो इन्हे अपने पैर पसारने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं दे रही है।

ये राह नहीं आसां
हमारा ट्रैफिक सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर इन बाइक्स के लिए एक बड़ी रुकावट है इन बाइक्स का लुफ्त उठाने के लिए आप इन्हे शहर में नहीं चला सकते क्यूंकि हमारे देश में इस प्रकार की बाइक्स को चलने के लिए सड़को का अभाव है। भारत में इन बाइक्स को चलने वाले ज्यादातर लोग या तो सेलिब्रिटीज या अमीर लोग है या फिर वो एक ग्रुप या आर्गेनाईजेशन बना कर इनका उपयोग करते है ये सब ग्रुप्स मिल कर टेक्नीकल प्रोब्लेम्स, सर्विस और स्पेयर पार्ट्स से जुड़ी समस्या का मिल कर समाधान करते है। दूसरी सबसे बड़ी कमी इनकी कीमत है. भारत में ज्यादातर बाइक्स पूरी तरह से आयातित होती है जिस पर भरी मात्रा में टैक्स लगा होता है जिससे इनकी कीमत आसमान छूने लगती है। एंट्री लेवल सेगमेंट की बात करे तो 4 – 4.5 लाख से शुरुआत होकर इनकी कीमत 60 – 70 लाख तक है. भारत में सुपर बाइक खरीदना तथा उससे जुडी समस्याओ का समाधान अभी भी एक बड़ा प्रश्न है ज्यादातर खरीददार बिना मार्किट सर्वे किये बाइक्स खरीद लेते है जिससे बाद में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
शुरुआत में इन बाइक्स का निर्माण निर्माता अपनी टेक्नीकल क्षमता को दिखने के लिए करते थे तथा बाद में ये लम्बी दूरी तथा कुछ रफ़्तार के शौक़ीन लोगो के लिए बनायीं गयी लेकिन अब इनका अपना एक अलग वर्ग है जो इन मशीन्स के दीवाने है भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व में इन बाइक्स के प्रति लगाव हर साल एक नए शिखर की और अग्रसर है। विश्व में होने वाली कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओ ने इन्हे आगे बढ़ने तथा अपना बाजार बढाने का सुअवसर प्रदान किया है।
भारत में मार्किट के हिसाब से दिल्ली एनसीआर क्षेत्र इनकी खरीद में अव्वल स्थान पर है, दूसरे स्थान पर मुंबई, फिर हैदराबाद, बेंग्लूरू और पुणे। इन स्थानों के अलावा चंडीगढ़, कोच्ची, इंदौर जैसे कुछ और शहर भी इसी पथ पर अग्रसर है। हर बाइकर की इच्छा एक सुपर बाइक खरीदने की होती है और आने वाले कुछ सालो में हम इनमें इजाफा भी देखेंगे लेकिन उससे पहले ब्रांड के बारे में सही जानकारी आफ्टर सेल सर्विस और टेक्नीकल असिस्टेंस के बारे में जानना बहुत जरूरी है सही निर्णय आपके सपनों को एक नयी उड़ान तथा आपके खुद के निर्णय पर गर्वित महसूस कराएगा।